हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह का जब इन्तेक़ाल हुआ तो उनकी नमाज़े जनाज़ा के लिए लोग इकठ्ठा हुए। भीड़ में ऐलान हुआ की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाने के लिए कुछ शर्तें हैं जिनकी वसीयत हज़रत ने की थी: (1) मेरी नमाज़े जनाज़ा वो शख़्स पढ़ायेगा जिसने कभी भी बग़ैर बुज़ू आसमान की तरफ़ न देखा […]
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वक्फ संशोधन विधेयक, मुस्लिम के लिए एक विचार का क्षण
वक्फ हमेशा से इस्लामी समाज का अभिन्न अंग रहा है। इसकी स्थापना मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों, पुस्तकालयों और अनाथालयों जैसे पवित्र स्थानों और संस्थानों की सुरक्षा और प्रचार के लिए की गई है। हर युग में मुसलमानों ने वक्फ के माध्यम से अपनी धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक सेवाएं निभाई हैं। लेकिन आज वक्फ की इस व्यवस्था […]
मदरसें सदियों से भारत की शिक्षा पद्धति का हिस्सा रहे हैं
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र बाबू, हिंदी के महान लेखक उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी की प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत मदरसे से हुई। मदरसों को लेकर जितना भ्रम फैलाया जाता है स्थिति बिल्कुल ही उसके विपरीत है। मदरसें सदियों से भारत की शिक्षा पद्धति का हिस्सा रहे हैं जिसमें पढ़ कर बच्चों ने अदब और […]


