कविता

ग़ज़ल: जो समुंदरों के रफ़ीक़ थे उन्हें तिश्नगी ने हरा दिया

कभी इल्म ने उसे मात दी कभी आगही ने हरा दियाजिसे तीरगी न हरा सकी उसे रौशनी ने हरा दिया कभी ख़ुश्क उन के न लब हुए रही जिन की क़तरों से दोस्तीजो समुंदरों के रफ़ीक़ थे उन्हें तिश्नगी ने हरा दिया जिन्हें बेबसी न हरा सकी उन्हें फिर न कोई हरा सकाजो ज़रूरतों के […]

कविता

ग़ज़ल: उस ने जब मेरी तरफ़ प्यार से फेंका पानी

ज़की तारिक़ बाराबंकवीसआदतगंज,बाराबंकी, यूपी छूते ही जिस्म को बन बैठा शरारा पानीउस ने जब मेरी तरफ़ प्यार से फेंका पानी एक मुद्दत से वो, जो सूख चला था पानीग़म तेरा सुन के मेरी आँख से निकला पानी ढालता जाता है ज़ौ रेज़ से मोती जानाँक़तरा क़तरा तेरे बालों से टपकता पानी पूछो मत लाया है […]