धार्मिक

शब-ए-क़द्र के फ़ज़ाइल व आ’माल

हुज़ूर सलल्ललाहु तआला अलैही वसल्लम की तमन्ना पर रब ने आपकी उम्मत को शबे क़द्र अता की जो 1000 महीनो की इबादत से अफज़ल है।📕 मुकाशिफातुल क़ुलूब,सफह 647 फुक़्हा:- जो शबे क़द्र मे इतनी देर इबादत के लिये खड़ा रहा जितनी देर मे चरवाहा अपनी बकरी दूह ले तो वह रब के नज़दीक साल भर […]

कविता

सदाए बदर

यौमे बदर (बदर का दिन) 17 रमज़ानुलमुबारक अहले हक़ के लिए उम्मीदों और हौसलों का अज़ीम निशां सितम हो लाख मगर खौ़फ़ ओ यास थोड़ी हैभरोसा रब पे है दुनिया से आस थोड़ी है हम अहले हक़ को है “ला तक़नतू” का परवानाकहीं शिकश्ता दिली आस पास थोड़ी है डरेंगे वो जो फ़क़त नाम के […]

कविता

नात-ए-पाक: भँवर में है फँसा मेरा सफीना पार हो जाए

काविश-ए-फिक्र: नासिर मनेरी मेरे सरकार मुझ पर भी करम इक बार हो जाएतड़पता हूँ पए दीदार अब दीदार हो जाए मिरे ऐ ना-खुदा कश्ती लगा दो पार अब मेरीभँवर में है फँसा मेरा सफीना पार हो जाए मुबारक अंदलीबो! तुम को तैबा के गुल-ओ-गुलशनमिरे हिस्से में बस तैबा का यारब ख़ार हो जाए सफर में […]

ऐतिहासिक

जंग ए बद्र: इस्लामी इतिहास का‌ पहला पवित्र युद्ध

इस्लामी तारीख़ की एक अहम जंग जिसमें मुसलमानों की तादात बहुत कम और कुफ्फार की तीन गुना ज्यादा थी लेकिन अल्लाह तआला ने इस जंग में मुसलमानों की मदद फरमाई और फतह हासिल हुई। जब नबी करीम ﷺ हिजरत करके मदीना तशरीफ़ लाए तो ये बात कुफ्फार ए मक्का को नागवार गुज़ारी और वो मुसलमानों […]

ऐतिहासिक

जंग-ए-बद्र

17 रमज़ान सन 2 हिजरी (13 मार्च 624 A.D.) जुमे के दिन इस्लामी तारीख की पहली जंग हुई थी जिसे जंग-ऐ-बद्र के नाम से जाना जाता है। अल्लाह ताला ने क़ुरान में जंग-ए-बदर के दिन का नाम यौमुल “फुरकान” रखा है। जंग में लश्करों की तादात: मुसलमान 313, घोड़े 2, ऊंट 70, जंगी सामान की […]

मसाइल-ए-दीनीया

रोज़े के तअल्लुक़ से ग़लत फहमियां और उनका दुरस्त जवाब

1️⃣: उल्टी आने से रोज़ा टूट जाता है।दुरुस्त मसला: चाहे कितनी ही उल्टी आने से रोज़ा नही टूटता, लेकिन जान बुझ कर मसलन: उंगली वगेरह मुंह मैं डालकर उल्टी की और वो मुंह भर कर हो तो रोज़ा टूट जाता है!जबके रोजेदार होना याद हो. 2️⃣:रोज़े की हालत में एहतेलाम हो जाए तो रोज़ा टूट […]

सामाजिक

सर झुका कर क्यों ?

लेखक: ग़ुलाम मुस्तफ़ा नई़मी, दिल्लीअनुवादक: मुहम्मद तशहीर रज़ा मरकज़ी, शाहजहांपुर इन दिनों हिंदुओं की लगभग हर रैली, जुलूस, यात्रा में एक गाना ख़ूब बजाया जा रहा है जिसके शब्द हैं;“टोपी वाला भी सर झुका के जय श्रीराम बोलेगा” शायद ही कोई रैली या सभा हो जिसमें यह गाना ना बज रहा हो, अगर यह रैली […]

मसाइल-ए-दीनीया

मसाइल-ए-रोज़ा (क़िस्त 01)

मसअला:रोजा शरीअत की बोलचाल में मुसलमान का इबादत की नियत से सुबहे सादिक से गुरुबे आफ़ताब तक अपने को कस्दन (जानबूझ कर) खाने पीने जिमा (यानी हमबिस्तरी) से बाज़ रखना (यानी रोक कर रखना) औरत का हैज़ (यानी MC) व निफास (यानी बच्चा होने के बाद जो खून आता है) से खाली होना शर्त है।📚 […]

धार्मिक

रोज़ा का बयान (क़िस्त 6)

हदीस शरीफ़:हाकिम ने कअब इब्ने अजरह रज़िअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:सब लोग मिम्बर के पास हाज़िर हों हम हाज़िर हुए जब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मिम्बर के पहले दर्जा पर चढ़े कहा आमीन दूसरे पर चढ़े कहा आमीन तीसरे पर चढ़े कहा आमीन जब. मिम्बर से […]

मसाइल-ए-दीनीया

सदक़ा-ए-फित्र

मसअला:सदक़ये फित्र मालिके निसाब मर्द वह औरत बालिग नाबालिग आक़िल पागल हर मुसलमान पर वाजिब है, 2 किलो 47 ग्राम गेंहू या उसकी क़ीमत अदा करें।📕अनवारूल ह़दीस सफह 257 हदीस:रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि बन्दे का रोज़ा आसमानो ज़मीन के बीच रुका रहता है जब तक कि सदक़ये फित्र अदा […]