धार्मिक

बयान-ए-रमज़ान (क़िस्त 03)

मसाइले रोज़ा ۞भूल कर खाने पीने या भूल कर जिमआ करने से रोज़ा नहीं टूटेगा।📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 112 ۞बिला कस्द हलक में मक्खी धुआं गर्दो गुबार कुछ भी गया रोज़ा नहीं टूटेगा।📕 बहारे शरीअत,हिस्सा 5,सफह 112 ۞ बाल या दाढ़ी में तेल लगाने से या सुरमा लगाने से या खुशबू सूंघने से रोज़ा नहीं […]

राजनीतिक सामाजिक

हिन्दू खतरे में या समाज खतरे में

लेखक: अजय असुरराष्ट्रीय जनवादी मोर्चा ये कहां आ गये हम? देश कहां जा रहा है? ये विडियो छत्तीसगढ़ का बताया गया है जहां हिन्दू संगठनो के कार्यकर्ता रैली के दौरान मस्जिद में घुसे और जय श्री राम के नारे लगाये व उत्पात मचाया। इस तरह की हरकतों से सिर्फ सांप्रदायिक दंगे होते हैं और इन […]

गोरखपुर मसाइल-ए-दीनीया

भूल कर कुछ खा लेने से रोज़ा नहीं टूटता: उलमा-ए-किराम

गोरखपुर। उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्प लाइन नंबरों पर गुरुवार को सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज़, रोज़ा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए। उलमा-ए-किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया। सवाल : रोजे की हालत में टूथपेस्ट करना कैसा? (ताहिर रज़ा, तिवारीपुर) जवाब : रोजे की […]

मसाइल-ए-दीनीया

तरावीह का बयान (क़िस्त 6)

मसअलाये जाइज़ है कि एक शख़्स इशा व वित्र पढ़ाए दूसरा तरावीह, जैसा कि हज़रत उमर रज़िअल्लाहू तआला अन्ह इशा व वित्र की इमामत करते थे और उबई बिन कअब रज़िअल्लाहू तआला अन्ह तरावीह की।📚आलमगीरी मसअलाअगर सब लोगों ने इशा की जमाअत तर्क कर दी तो तरावीह भी जमाअत से ना पढ़ें हां इशा जमाअत […]

मसाइल-ए-दीनीया

रोज़े के मकरूहात

सवाल:रोज़े के मकरूहात क्या क्या है ? ۞۞۞ जवाब ۞۞۞ १. बिला उजर किसी चीज़ का चबाना।अलबत्ता किसी औरत का शोहर बद मिजाज़ हो, और खाना ख़राब होने पर उसके गुस्से होने का अंदेशा हो तो उसे नमक ज़बान की नोक पर रख कर चखने की इजाज़त है। इसी तरह अगर छोटे बच्चे को रोटी […]

धार्मिक

बयान-ए-रमज़ान (क़िस्त 02)

रोज़े के मसाइल में ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह रोज़े के बारे में लोगों में पाई जाने वाली 10- ग़लत बातें जिन की कोई हक़ीक़त नहीं। पूरा ज़रूर पढ़ें! No.1 ग़लत फ़ेहमी- कुछ लोग समझते हैं कि रोज़ा इफ़्तार की दुआ रोज़ा खोलने से पहले पढ़ना चाहिए और वह पहले दुआ पढ़ते हैं फिर रोज़ा […]

जीवन चरित्र

लफ़्ज़ों के जादूगर इक़बाल अब्बासी जी

जी हाँ दोस्तों !खजराना के रहने वाले इक़बाल हुसैन जी लफ़्ज़ों के जादूगर है। जब आप लफ़्ज़ों और क़लम की नोंक चलाते है तो इनके लफ़्ज़ खुशबू बिखेरते हुए चलते है। इनकी लेखनी में अपनापन , साफगोई और ईमानदारी रहती है। कोई लाग-लपेट नहीं । कोई स्वार्थ नहीं।इनकी लेखनी में सिर्फ ख़िदमत छुपी होती है। […]

धार्मिक

बयान-ए-रमज़ान (क़िस्त 01)

रमज़ान रम्ज़ से बना है जिसके मायने हैं जलाना चुंकि ये महीना भी मुसलमानों के गुनाहों को जला देता है इसलिये इसे रमज़ान कहा गया या रम्ज़ का एक मायने गर्म जमीन से पांव जलना भी है चुंकि माहे रमज़ान में मुसलमान अपने नफ़्स को भी जलाता है इसलिए ये नाम पड़ा या रमज़ान गर्म […]

मसाइल-ए-दीनीया

पाँच वुजुहात की बिना पर रोज़ा न रखने की इजाज़त

सवाल:शरीअत मे किन वुजूहात की वजह से रोज़ा न रखने की इजाज़त है ? जवाब: नीचे दी गई पांच वुजूहात की वजह से रोज़ा न रखने की इजाज़त है: (1) मर्ज़(बिमारी)जिसकी वजह से रोज़ा रखने की ताक़त न हो। या रोज़ा रखने से बिमारी बढ़ जाने का अंदेशा हो।(बिमारी खतम होने के बाद क़ज़ा करना […]

मसाइल-ए-दीनीया

तरावीह का बयान (क़िस्त 5)

मसअलाहर दो रकअत के बाद दो रकअत पढ़ना मकरूह है यूंही दस रकअत के बाद बैठना भी मकरूह।📚दुर्रे मुख़्तार📚आलमगीरी मसअलातरावीह में जमाअत सुन्नते किफ़ाया है के अगर मस्जिद के सब लोग छोड़ देंगे तो सब गुनाहगार होंगे और अगर किसी एक ने घर में तन्हा पढ़ ली तो गुनाहगार नहीं मगर जो शख़्स मुक़तदा हो […]