मसाइल-ए-दीनीया

पाँच वुजुहात की बिना पर रोज़ा न रखने की इजाज़त

सवाल:
शरीअत मे किन वुजूहात की वजह से रोज़ा न रखने की इजाज़त है ?

जवाब: नीचे दी गई पांच वुजूहात की वजह से रोज़ा न रखने की इजाज़त है:

(1) मर्ज़(बिमारी)
जिसकी वजह से रोज़ा रखने की ताक़त न हो। या रोज़ा रखने से बिमारी बढ़ जाने का अंदेशा हो।
(बिमारी खतम होने के बाद क़ज़ा करना ज़रूरी)

(2) मुसाफिर
शरई मुसाफिर। जिसकी कम से कम सफर की मिक़दार 77.50km है।
(मुक़ीम होने के बाद क़ज़ा करना ज़रूरी)
नोट: सफरे शरईमें रोज़ा न रखने की इजाज़त तो है लेकिन अगर रोज़ा रखने में ज़्यादा तकलीफ न हो तो रोज़ा रखना बेहतर है।

(3) बुढ़ापा
ऐसा बूढ़ा कमज़ोर (बूढ़ा/बुढ़िया) जो रोज़ा न रख सकते हो और वो रोज़े के बदले फिदया 1कि.750ग्राम गरीब को दे।
(लेकिन अगर अल्लाह सेहत दे तो क़ज़ा करना ज़रूरी है।)

(4) हामिला/दूध पिलाने वाली
जिनको रोज़ा रखने से अपनी जान या बच्चे को तकलीफ पहुँचने का अंदेशा हो।
(बाद में क़ज़ा करना ज़रूरी है)

(5) हैज़ व निफ़ास
हाईज़ा व निफ़ाज़ वाली औरतों के लिये रोज़ा रखना दुरुस्त नहीं।
अगर रख ले तो रोज़ा अदा न होगा। और ये गुनहगार होगी।
(पाक होने के बाद रोज़ों की क़ज़ा करना ज़रूरी है।)
📘फतावा रहीमिया 7/270

लेखक: मुफ्ती इमरान इस्माइल मेमन

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