लेखक: अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी, मुरादाबाद यूपी भारत प्यारे अज़ीज़ दोस्तो मुनासिब यही है के लोगों को हम नमाज़ रोज़ा हज व ज़कात और दीगर अहकामे शरिअह पर अमल करने की दावत भी देते रहें और ख़ुद भी अमल करने की कोशिश करते रहें जब हम ख़ुद अमल करेंगे और फिर दूसरों को नेकी की दावत […]
धार्मिक
हमारे नबी पूर्णतः रहमत ही रहमत
लेखक: जफर कबीर नगरीछिबरा, धर्मसिंहवा बाजार, संत कबीर नगर, उ.प्र. दुनिया के सर्वोच्च नेता, वैश्विक मार्गदर्शक और परमेश्वर के अंतिम संदेष्टा हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह तआला ने दुनिया के लिए रहमत (दया) के रूप में भेजा, उनकी दया का दायरा केवल मानवता तक सीमित नहीं , अपितु यह दया व्यापक और […]
ग़ुस्ल (स्नान) के मसाइल
लेखक:मह़मूद रज़ा क़ादरी, गोरखपुर बिना ग़ुस्ल यह काम नहीं कर सकते मस्जिद में जाना। तवाफ़ करना। क़ुरआन शरीफ़़ छूना चाहे उसका सादा हाशिया या जिल्द वग़ैरा ही हो। बिना छुए देख कर या ज़ुबानी क़ुरआन पाक पढ़ना। आयत का लिखना या आयत का तावीज़ लिखना या ऐसा तावीज़ छूना। ऐसी अँगूठी पहनना जिसमें हुरूफ़े मुक़त्तयात […]
अल्लाह व रसूल का फ़रमान और आज का मुसलमान (क़िस्त 7)
लेखक: अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरीमुरादाबाद यू पी, इंडिया दोस्तो आजकल अगर किसी की इस्लाह की जाए तो जवाब मिलता है मियां तुम अपनी करो अपने आप को संभालोऐसा जवाब निहायत ही मज़मूम है और गुनाहों पर बड़ी दिलेरी है| चुनाचे हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाहू तआला अन्ह फ़रमाते हैं किअल्लाह तआला के नज़दीक ये एक बड़ा […]
