धार्मिक

अल्लाह व रसूल का फ़रमान और आज का मुसलमान (क़िस्त 7)

लेखक: अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी
मुरादाबाद यू पी, इंडिया

दोस्तो आजकल अगर किसी की इस्लाह की जाए तो जवाब मिलता है मियां तुम अपनी करो अपने आप को संभालो
ऐसा जवाब निहायत ही मज़मूम है और गुनाहों पर बड़ी दिलेरी है|

चुनाचे हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाहू तआला अन्ह फ़रमाते हैं कि
अल्लाह तआला के नज़दीक ये एक बड़ा गुनाह है के कोई शख़्स दूसरे को बतौरे नसीहत कहे के तू अल्लाह तआला से डर
तो बुराई करने वाला उसका जवाब दे तू अपने आप को संभाल (तम्बीहुल ग़ाफ़िलीन)

सहाबी ए रसूल
हज़रत हुज़ैफ़ा रज़िअल्लाहू तआला अन्ह फ़रमाते हैं के

अनक़रीब एक ऐसा वक़्त आने वाला है के लोगों को नेकी का हुक्म देने वाले और बुराइयों से रोकने वाले मोमिन से मरा हुआ गधा ज़्यादा पसंदीदा होगा (मुकाशिफ़तुल क़ुलूब)

यानी मुबल्लिग़े-दीन यानी जो लोगों की इस्लाह करता है उसको लोग मरे हुए गधे से ज़्यादा बुरा समझेंगे (मआज़ अल्लाह)

नासिहा मत कर नसीहत दिल मेरा घबराए है
उसको दुश्मन जानता हूं जो मुझे समझाए है

प्यारे अज़ीज़ दोस्तो मंदरजा बाला अक़्वाले बुज़ुर्गाने दीन से ये मालूम होता है के जो कोई भी नेकी की दावत देता है और बुराइयों से रोकता है तो कुछ जाहिल लोग उसकी ज़रूर मुख़ालिफ़त करते हैं|
अम्बिया अलैहिमुस्सलाम के साथ भी ऐसा ही हुआ है और ख़ुद हमारे आक़ा हुज़ूर सय्यदे आलम सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम के साथ भी लोगों ने बदअख़्लाक़ी का मुज़ाहिरा किया और आपको तकलीफ़ैं पहुंचाईं|

लिहाज़ा लोगों की इस्लाह करने वाले को चाहिए के लोगों की मुख़ालिफ़त से सब्र और हिम्मत से काम ले और हिम्मत ना हारे बल्के मज़ाक़ उड़ाने वालों के साथ भी शफ़्क़त का बरताव करे के ये बेचारे गुनाहों के कीचड़ में फंसे हुए हैं और शैतान की बातों में आकर बदसुलूकी कर रहे हैं अगर आपने भी उनकी बदसुलूकी पर बदअख़्लाक़ी का मुज़ाहिरा करते हुए ईंट का जवाब पत्थर से दिया तो फिर उनमें और आपमें क्या फ़र्क़ रह जाएगा,
क्योंके डाक्टर जब मरीज़ के ज़ख्म पर दवाई लगाता है तो कभी कभी मरीज़ दर्द की वजह से चिल्लाता है और डाक्टर के साथ बद्तमीज़ी करता है मगर डाक्टर उसपर गुस्सा नहीं करता क्योंके वो जानता है के ये दर्द के सबब ऐसा बोल रहा है, जब दर्द में आराम मिलेगा तो ख़ुद ही चिल्लाना बदतमीज़ी करना छोड़ देगा,
इसी तरह गुनाहों के मरीजों को भी जब कोई समझाता है तो उनके नफ़्स पर गिरां (भारी) गुज़रता है जिसके सबब कभी कभी वो भी चिल्लाते गालियां बकते हैं लेकिन आप सफ़्क़त करते रहें जब आपकी दीनी दावत उनकी समझ में आ जाएगी तो ख़ुद ही चिल्लाना बदतमीज़ी करना छोड़ देंगे बल्के अपने किए पर शर्मिंदा होंगे और हो सकता है यही शर्मिंदगी उनके लिए तरक़्क़ी ए दर्जात का सबब बन जाए और अगर आपने शफ़्क़त ना की बल्के शिद्दत का रवैया अपनाया तो हो सकता है के वो बेचारा अपने गुनाहों की वजह से तबाह व बर्बाद हो जाए,
लिहाज़ा दीन के रास्ते में जितनी भी तक्लीफ़ें आएं उन्हें हंसी ख़ुशी बर्दाश्त करते रहें क्योंके सब्र करना भी एक अज़ीम सुन्नत है लिहाज़ा आप लोगों के लिए फ़िक्रमंद रहें उनकी बुराइयों को देखकर अंदर ही अंदर घुटते रहें और उनकी इस्लाह की तदबीर सोचते रहें क्योंके ये भी मोजिबे अज्र व सवाब है|

इन्शा अल्लाहुर्रहमान पोस्ट जारी रहेगी……

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