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खलील अहमद फैज़ानी माल व मरतबा का हिर्स निहायत हीनुकसान दह है …इन दोनों की मोहब्बत दुनिया की मुहब्बत पैदा करती है और खालिक की इताअत से दूर करती है …हज़रत काअब बिन मालिक रदी अल्लहो ताआला अन्ह से रिवायत है रसुलुल्लाह सल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया दो भुखे भेड़िए बकरियों के रेवड़ में […]
कविता: रमज़ान जा रहा हैकवि: नासिर मनेरीसंस्थापक व अध्यक्ष: मनेरी फाउंडेशन, इंडिया ग़मगीन सब को कर के मेहमान जा रहा है।कर के उदास माह-ए-गुफरान जा रहा है।। मस्जिद की रौनकें भी अब खत्म हो रही हैं।सदमा हज़ार देकर रमज़ान जा रहा है।। रोजा नमाज़, सहरी, इफ्तारी व तरावीह।हमराह-ए-हर सआदत मेहमान जा रहा है।। रहमत थी, […]