धार्मिक

अल्लाह व रसूल का फ़रमान और आज का मुसलमान (क़िस्त 2)

लेखक: अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी
मुरादाबाद यू पी, इंडिया

हदीस शरीफ़

हुज़ूर सय्यदे आलम सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने फ़रमाया: जिस क़ौम में गुनाह होते हों और नेक लोग रोकने पर क़ादिर हों फिर भी ना रोकें तो क़रीब है के अल्लाह तआला सब पर अज़ाब भेजे (अबू दाऊद)

हदीस शरीफ़

हज़रते सय्यिदुना मालिक बिन दीनार फ़रमाते हैं: अल्लाह तआला ने फ़िरिश्तों को हुक्म फ़रमाया के फ़ुलां फ़ुलां गांव पर अज़ाब करो तो फ़िरिश्तों ने बड़ी आजिज़ी से इल्तिज़ा की, ऐ अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल इसमें फ़ुलां फ़ुलां तेरा नेक बंदा भी है, अल्लाह तआला ने फ़रमाया इसे अज़ाब दे कर मुझे इसकी चीख़ व पुकार सुनाओ क्योंके इसका चेहरा मेरी नाफ़रमानियों को देखकर कभी मुतग़य्यर नहीं हुआ (तम्बीहुल मुग़त्तरीन)

यानी जिस तरह कोई आदमी अपने अज़ीज़ या अक़ारिब से किसी काम को करने के लिए कहे और वो ना सुने अनसुनी करदे तो वो किस क़दर नाराज़ हो कर उसको डांटता है और लड़ने के लिए तैयार हो जाता है मगर अफ़सोस है के अल्लाह तआला की ना फ़रमानी करने वालो की ना इस्लाह करता है और ना उनसे नाराज़ होता है, तो ऐसे लोग इस हदीस शरीफ़ से सबक़ हासिल करें,

हदीस शरीफ़

हज़रते सय्यिदुना अबू दर्दा रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से मरवी है के
हुज़ूर सय्यदे आलम सल्लल्लाहू त अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: तुम नेकी का हुक्म करो. वरना तुम पर किसी ज़ालिम बादशाह को मुसल्लत कर दिया जाएगा, जो तुम्हारे छोटे पर रहम नहीं करेगा और तुम्हारे नेक लोग दुआ करेंगे मगर उनकी दुआएं क़ुबूल नहीं होंगी, वो मुआफ़ी मांगैगे, मगर उनको मुआफ़ी नहीं मिलेगी ( मुकाशिफ़तुल क़ुलूब)

प्यारे मुसलमानों इस हदीस शरीफ़ से सबक़ हासिल कीजिए, आजकल जो ज़ालिम हुक्मरान हम पर मुसल्लत कर दिए गए हैं और हम मुसलमानों को सता रहे हैं इसकी यही वजह है के हम लोगों ने शरीअते मुस्तफ़ा को छोड़ दिया है इसी लिए अल्लाह तआला हम से नाराज़ हो गया है और इसीलिए हम लोग मारे जा रहे हैं और फिर ऊपर से हमारा ईमान भी लूटा जा रहा है यानी बातिल माबूदों के नाम के नारे भी लगवाए जा रहे हैं,

डाक्टर इक़बाल कहते हैं

तरीक़ा ए मुस्तफ़ा को छोड़ना है वजहे बर्बादी
इसी से क़ौम दुनिया में हुई बे इक़्तिदार अपनी,

यानी जिसने हुज़ूर अलैहिस्सलाम के तरीक़े को छोड़ दिया वो बर्बाद हो जाता है और जो हुज़ूर अलैहिस्सलाम की फ़रमाबरदारी करता है तो सारी दुनिया में राज करता है, यानी सब लोग उसके वफ़ादार हो जाते हैं और उसकी ताज़ीम करते हैं,

इसलिए हम लोग तमाम गुनाहों से तौबा करके शरीअत की पाबंदी करलें, ख़ुदारा अपने आप को शरीअत का पाबंद बनाओ अगर आज और अभी हम लोग तमाम गुनाहों से तौबा करके शरीअत की पाबंदी करलें तो इन्शा अल्लाहुर्रहमान हम ही कामयाब होंगे और हमारा कोई ज़ालिम कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेगा, जैसा के अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया⬇

तर्जमा— ऐ ईमान वालो तुम अपनी फ़िक्र रखो, तुम्हारा कुछ ना बिगाड़ेगा जो गुमराह हुआ जब्के तुम राह पर हो (पारा 7, रुकू 4)

यानी अगर मुसलमान सुन्नी सहीहुल अक़ीदा रहे और ब अमल यानी शरीअत के पाबंद हो जाएं तो इन्शा अल्लाहुर्रहमान ये गुमराह ज़ालिम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते,

प्यारे भाइयो इस आयते करीमा के बज़ाहिर तर्जुमा से ये भी ना समझ लेना के जब हम ख़ुद हिदायत पर हैं तो गुमराह की गुमराही हमारे लिए मुज़िर नहीं (नुक़सान नहीं पहुंचा सकती) और हमको किसी गुमराह को गुमराही से रोकने की ज़रूरत नहीं) बल्के हमें उनकी इस्लाह करनी है,

हदीस शरीफ़

हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया: लोग अगर बुरी बात देखें और उसको ना रोकें तो क़रीब है के अल्लाह तआला उनपर ऐसा अज़ाब भेजेगा जो सबको घेर लेगा (इब्ने माजा)

आजकल यही वजह है के अज़ाबे इलाही हमें घेरे हुए है,
के कोई सख़्त बीमार है तो कोई सताया जा रहा है, तो कोई मारा जा रहा है, तो ऐ ईमान वालो
ख़ुदारा तमाम गुनाहों से तौबा करके अपने आपको शरीअत का पाबंद बनालो, यानी नमाज़ रोज़ा की पाबंदी करो और गाने बाजे फिल्मी ड्रामा झूट ग़ीबत चुग़ली गाली गलोंच और तमाम हराम कामों से तौबा करके अपने चेहरे इस्लामी बनालो, वरना यहां और ज़्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, और क़ब्र व आख़िरत में ज़िल्लत का अज़ाब,
अल अयाज़ू बिल्लाही तआला

इन्शा अल्लाहुर्रहमान
पोस्ट जारी रहेगी……

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