महाराजगंज

केवल खाने-पीने पर बंदिशों का नाम रोजा नहीं, बल्कि खुद को अनुशासन में रखने का रूहानी प्रशिक्षण भी है रोजा नूरुलहुदा मिस्बाही

गोरखपुर,( प्रेस विज्ञप्ति) रमजान में भलाई के चाहने वालों को भलाई के काम पे आगे बढ़ना चाहिए और बुराई के चाहने वालों को अपनी बुराई से रुक जाना चाहिए।
हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया: जब रमजान की पहली रात होती है तो शैतान और सरकश जिन जंजीरों में जकड़ दीए जाते हैं, जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, और उसका कोई भी दरवाजा खुला हुआ नहीं रहता, जन्नत के दरवाजे खोल दीए जाते हैं, और उसका कोई भी दरवाजा बंद नहीं रहता, पुकारा जाता है ए भलाई के चाहने वाले भलाई के काम पे आगे बढ़, और ए बुराई के चाहने वाले अपनी बुराई से रुक जा। करम फरमाने वाले अल्लाह ने इस पवित्र महीने में अपने बंदों को हर नेकी का 70 गुना सवाब देता है। रमजान का पहला अशरा रहमत, दूसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नम की आग से निजात का है। रमजान माह मन की गंदगी, तन के प्रदूषण और गलत विचारों की बुराई को दूर करता है। याद रहे केवल खाने-पीने पर बंदिशों का नाम रोजा नहीं, बल्कि खुद को अनुशासन में रखने का रूहानी प्रशिक्षण भी है। कुरान रमजान के महीने में नाजिल हुआ। रमजान की जीनत कुरान पाक और कुरान की जीनत तिलावत है।
रमजान के पाक महीने में नाजिल हुआ कुरान हमें मानव उत्थान, आपसी सौहार्द, भाईचारे और अमन की शिक्षा देता है। रमजान में अल्लाह तआला की इबादत के साथ प्रेम, भाईचारा व सौहार्द का पैगाम आम करें। इंसानियत, हमदर्दी, गरीबों की सेवा, प्रेम, भाईचारा, सौहार्द आदि को बढ़ावा दें। रमजान में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगें। सदका, जकात, खैरात देकर गरीबों की मदद करें। उपरोक्त बातें सीनियर पत्रकार राष्ट्रिय सहारा उर्दू, नूरुलहुदा मिस्बाही, सईदुल उलूम लक्ष्मीपुर, व जामिया अशरफिया मुबारकपुर सलाहकार समिति के सदस्य ने प्रेस विज्ञप्ति में कहीं।

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