कविता

मोहब्ब-ए-वतन: हमारी जान है भारत

ज़की तारिक़ बाराबंकवी
सआदतगंज, बाराबंकी, यूपी
मोबाइल नम्बर:7007368108

तमन्ना, आरज़ू, हसरत, तलब, अरमान है भारत
हमारा दिल भी है भारत हमारी जान है भारत

तेरी अज़मत पे हर बासी तेरा क़ुर्बान है भारत
तेरी ये आन है भारत तेरी ये शान है भारत

ये बस यूँही नहीं है तुझ में इतनी ख़ूबियाँ ही हैं
जो हम सब की ज़बानों पर तेरा गुनगान है भारत

कोई भी देश हो या उस का बाशिन्दा हो हाकिम हो
तेरी ये शानो-शौकत देख कर हैरान है भारत

अवाम इस के बहुत सी ज़ातों और धर्मों पे मबनी हैं
बताओ तो ज़रा इक मुल्क या गुलदान है भारत

कोई भी देश इस की अज़्मतों को छू नहीं सकता
क़सम अल्लाह की कुछ इस क़दर ज़ीशान है भारत

जिसे इक़बाल, ग़ालिब, मीर सीने से लगाते थे
वही तहज़ीब का गहवारा हिंदुस्तान है भारत

बताता है हमें इस का तरक़्क़ी करता हर लम्हा
उरूज आरा तमामी मुल्कों का सुल्तान है भारत

इसी ने तो तुझे ये पुर कशिश रअनाई बख़्शी है
ऐ दुनिया ख़ूबरू दुनिया तेरी पहचान है भारत

तुझे दुनिया के नक़्शे से मिटा सकता है पल भर में
मगर तुझ पर तरस खाता ऐ पाकिस्तान है भारत

तेरी ख़ातिर मैं अपनी ज़िंदगी क़ुर्बान कर दूँगा
तेरी चाहत, मोहब्बत तो मेरा ईमान है भारत

हमारी भूक बढ़ने से ज़रा पहले “ज़की तारिक़”
अभी तो खेत था भारत अभी खलयान है भारत

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