वतन फरोश दुकाने सजाए बैठे हैं।्
घर की हर चीज पर आंखें जमाए बैठे हैं
प्रयागराज। संगम नगरी की प्रयागराज में आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को पुस्तक मेला-2021 के परिसर में अकबर इलाहाबादी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर ‘जश्न-ए-अकबर इलाहाबादी कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डा0 विजियानन्द तिवारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दी महासभा नई दिल्ली ने किया। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में अखिलेश सिंह उपाध्यक्ष नगर निगम इलाहाबाद रहे। विशिष्ट अतिथि के रुप में स्वास्तिक बोस प्रधानाचार्य एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज रहे। इस कार्यक्रम के संचालककर्ता डॉक्टर सालेहा सिद्दीकी अध्यक्ष जिया-ए-हक फाउंडेशन ने पूर्ण की। कवि सम्मेलन का मुशायरा के संयोजक डॉ अजय मालवी सदस्य साहित्य अकादमी दिल्ली और प्रोग्राम आयोजक मनोज सिंह चंदेल गौरव, मनीष गर्ग और आकर्ष रहे। इस अवसर पर डॉ सालेहा सिददीकी की पुस्तक ‘‘डरामा अल्लमा’’ का विमोचन भी किया गया। मुशायरे के कवजिनों में फरमूद इलाहाबादी, हेलाल इलाहाबादी, नीलिमा मिश्रा, पियूष मिश्रा, अंशुल त्रिपाठी, अजय मालवीय, सुशांत चट्टोपाध्याय, डॉ0 सालेहा सिद्दीकी, विजय तिवारी ने अपना-अपना कलाम पेश किया।
डॉ अजय मालवीय ने पढ़ा कहो तो वक्त है कितना तुम्हारे आने में, अंधेरा फैलता जाता है अब जमाने में, और फरमाया वतन फरोश दुकाने सजाए बैठे हैं, घर की हर चीज पर आंखें जमाए बैठे हैं’ तो तालियों के गडगडाहट से पुस्तक मेले का सांस्कृतिक मंच गूंज उठा। समझना है जिसे समझे, ऐ साबेहा, इन आंखों की कहानी को, बडा पुर दर्द है किस्सा, भला हैं चुप रहे तो आंखें, डॉक्टर सलेहा सिद्दीकी ने पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। वहीं पहले दो आशिकों की फोटो दिखा के बोली इसको हंसा के मारा उसको रुला के मारा, फरमूद इलाहाबाद ने फरमाया। जो क्षींटे ना पड़ती मेरे आंखों की उन पर, तो चेहरे भी उनके गुलाबी ना होते, को पढ़कर तलब जौनपुर ने पुस्तक प्रेमियों का दिल जीता। इसी तरह से ‘वह जिसकी सोच को चाटा हो धन के दिमक ने वह आदमी ही नहीं अदीब क्या होगा’ डॉक्टर विनयानन्द ने पढ़ा। ‘ठोकर खाकर हजारों सांवरती ये जिंदगी, कैसे अनचाहे ठिकानों से गुजरती ये जिन्दगी को जब डा0 शंभू नाथ त्रिपाठी अंशुल ने पढा तो लोग वाह-वाह कर उठे। अंत में ‘अपनी मिट्टी से बगावत नहीं होगी हमसे से, हम शजर है कोई हिजरत नहीं होगी हमसे’ पढ़कर डॉक्टर जलालपुर पुरी ने भी काफी वाह-वाही लूटी।
Zia e haq Foundation ki peshkash…