जीवन चरित्रधार्मिक

हज़रत ए उवैस करनी रजीयल्लाहु अन्हो

लेखक: मह़मूद रज़ा क़ादरी, गोरखपुर

करनी की वज्ह तसमीया?
कर्न यमन के नवाह में एक छोटा सा गांव है जब उसकी तामीर के सिलसिला में खुदाई की गई तो ज़मीन से गाय का एक सिंग निकला अरबी में चूंकि सिंग को कर्न कहते हैं इसलिए गांव का नाम कर्न मशहूर हो गया यमन के लोग निहायत रकीकुल कल्ब और हक शनास होते हैं हजरत अनस रजि अल्लाह ताला अन्हो इसी नाम की निस्बत से करनी कहलाते हैं कुछ लोगों का ख्याल है कि हजरत उवैस करनी रजि अल्लाह ताला अन्हो की जिसमें मुबारक पर बाल बहुत ज्यादा थे इसलिए उन्हें कर्नकहा गया

हसब नसब
आप रजील्लाह ताला अन्हो कर्न के मुराद नामी कबीला के एक शख्स आमिर के घर पैदा हुए चंद रिवायत के मुताबिक आपका नाम अब्दुल्ला जबकि बाद के मुताबिक इब्ने अब्दुल्ला मिलता है आप रजियल्लाह ताला अन्हो का नाम ए मुबारक अब्दुल्लाह इब्ने आमिर रजियल्लाहू अन्हू भी पुकारा जाता है मगर आप रजियल्लाहू अन्हू की वालिदा मजीदा ने आप रजियल्लाह अन्हो का नाम ए मुबारक उवैस रजियल्लाहू अन्हू रखा और उसी से आप रजियल्लाहू अन्हू ज्यादा मशहूर हुए। –
उवैस बिन आमिर बिन जुजा बिन मालिक बिन अमरू बिन सअद बिन असवान बिन कर्न बिन रूमान बिन नाजिया मुराद बिन मालिक ——-ये खानदान यारिब बिन कहतान तक जाकर खत्म हो जाता है।
हजरत उवैस करनी रजियल्लाह ताला अन्हो के वालिद गिरामी आप रजी यल्लाहू अन्हू की कम उम्र में ही इंतकाल कर गए और वालिदा बूढ़ी(ज़ईफ) और नाबीना थीं जिनकी खिदमत में हजरत उवैस करनी रजियल्लाहो अन्हो ने उमरे मुबारक का ज्यादातर हिस्सा बसर फरमाया

दीन, हजरत ए उवैस करनी र0अ0
बाद लोगों का ख्याल है कि कबीला मुराद ने अपना आबाई मजहब तर्क कर दिया था और जलीलुल कद्र पैगंबर हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम के पैरोकार बन गया था इस लिहाज से हजरत उवैस करनी रजियल्लाह ताला अन्हो एक मुसलमान कबीला और खानदान में पैदा हुए हजरत उवैस करनी रजियल्लाह अन्हो का सरकारे मदीना सरवरे कल्बो सीना सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर ईमान लाने के बारे में मुख्तलिफ रिवायात मिलती हैं इसलिए कुछ कहना मुश्किल है मगर यह जरूर कहा जाता सकता है कि
सरवरे कायनात सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की रिसालत और फैजो़ बरकात की जब तमाम अरब में शोहरत हुई तो दूसरे इलाकों की तरफ यमन के लोग भी हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के इसमें मुबारक और जाते गिरामी से आगाह हो गए।
हजरत उवैस करनी रजियल्लाह ताला अन्हो को अल्लाह ताला ने फितरते सालेह अता की थी उन्होंने जब जिक्रे पाक रहमतल लिल आलमीन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम सुना तो दिल ने सरकार सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के सच्चे रसूल होने की गवाही दे दी गोया उनको गाइबाना तस्दीक ए कल्बी हासिल हो गई और फिर ये ईमान वालिहाना इश्क की सूरत अख्तियार कर गया इसी इश्क ने आप रजीयल्लाह अन्हो को फना फिर्रसूल कर दिया आप रजियल्लाहू अन्हू हर वक्त सरकारे दो आलम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के अहवाल की जुस्तजू करते रहते और हर वक्त सुन्नत ए मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर चलने की कोशिश करते रहते थे।
जोह्द, कनाअत, इबादत, व रियाज़त, और इत्तेबा ए रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कि उन्होंने एैसी मिसाल क़ायम की कि आजतक सुलहा ए उम्मत के लिए बाइस ए रश्क है।

आगे पोस्ट जारी रहेगा। ———-

शोऐब रज़ा

विश्व प्रसिद्ध वेब पोर्टल हमारी आवाज़ के संस्थापक और निदेशक श्री मौलाना मोहम्मद शोऐब रज़ा साहब हैं, जो गोरखपुर (यूपी) के सबसे पुराने शहर गोला बाजार से ताल्लुक रखते हैं। वे एक सफल वेब डिजाइनर भी हैं। हमारी आवाज़

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