साल 2013 में 14 जुलाई को टेलीग्राम सर्विस यानी भारतीय तार सेवा की पारी ख़त्म हो गई.
साल 1850 में कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच तार सेवा शुरू हुई, 1854 में ये पब्लिक के लिए शुरू हुई.
एक वक़्त लाखों-करोड़ों लोगों के लिए यह संदेश पहुंचाने का सबसे तेज जरिया होता था.
तार सेवा के आखिरी दिन दो हजार मैसेज बुक किए गए. आखिरी तार अश्विनी मिश्र ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भेजा था।
Related Articles
कैसे हुई थी दुनिया का सबसे कम उम्र के योद्धा मुहम्मद बिन कासिम की मौत
हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसेज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसेन गोर-ए-सिकंदर न है क़ब्र-ए-दारामिटे नामियों के निशाँ कैसे कैसे तब तज़किरा हो मोहम्मद बिन क़ासिम का तो अमीर मीनाई का लिखा हुआ ये शेर ज़ेहन में आ ही जाता है एक ऐसा शख्स जिसने इतनी कम उम्र में सिंध फतह कर लिया और वो मक़ाम […]
जंग-ए-बद्र
17 रमज़ान सन 2 हिजरी (13 मार्च 624 A.D.) जुमे के दिन इस्लामी तारीख की पहली जंग हुई थी जिसे जंग-ऐ-बद्र के नाम से जाना जाता है। अल्लाह ताला ने क़ुरान में जंग-ए-बदर के दिन का नाम यौमुल “फुरकान” रखा है। जंग में लश्करों की तादात: मुसलमान 313, घोड़े 2, ऊंट 70, जंगी सामान की […]
हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह की वसीयत और सुल्तान शमसुद्दीन अल्तमस
हज़रत ख़्वाजा बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह का जब इन्तेक़ाल हुआ तो उनकी नमाज़े जनाज़ा के लिए लोग इकठ्ठा हुए। भीड़ में ऐलान हुआ की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाने के लिए कुछ शर्तें हैं जिनकी वसीयत हज़रत ने की थी: (1) मेरी नमाज़े जनाज़ा वो शख़्स पढ़ायेगा जिसने कभी भी बग़ैर बुज़ू आसमान की तरफ़ न देखा […]

