धार्मिक

इफ्तार करवाने का सवाब

लेखक: जावेद शाह खजराना

हजरत सलमान फारसी रज़िअल्लाहु तआला ने कहा कि रसूल करीम ने फ़रमाया:
रमज़ान में मोमिनों की रोजी बढ़ा दी जाती है।
और जो शख्स हलाल रोजी में से रोजेदार को इफ़्तार कराएगा उसके गुनाहों की बख्शिश है और उसकी गर्दन जहन्नुम से आज़ाद कर दी जाएगी।

इफ़्तार कराने वाले को भी वही सवाब मिलेगा जैसा सवाब रोजा रखने वाले को मिलता है। (सुभान अल्लाह)

ये सुनकर सहाबियों ने अर्ज किया – “या रसूलअल्लाह हम में से हर शख़्स रोजा खुलवाने की हैसियत नहीं रखता।”
हुजूर ने फरमाया:
“अल्लाह तआला की रहमत् के ख़ज़ाने में कोई कमी नहीं है अल्लाह उस शख्स को भी वही सवाब देगा को रोजेदार को सिर्फ एक घूंट दूध या एक खजूर या एक घूंट पानी से इफ्तार कराए।”
जिस शख्स ने रोजेदार को भरपेट खाना खिलाया अल्लाह उसे मेरे जन्नती हौज से पानी पिलाएगा।
वो कभी प्यासा ना होगा।
यहाँ तक कि इस नेक अमल के सदके में जन्नत में दाखिल हो जाएगा।
सुभान अल्लाह!!!

देखा दोस्तों रोजा खुलवाने की भी कितनी फजीलतें है।
ब-हैसियत हम लम्बी-चौड़ी दावत न सही रोजदार को कम से कम पानी और खजूर तो दे ही सकते है। इस अमल को करने का सबसे बेहतरीन तरीका है मस्जिदों में इफ्तारी भेजना। जहाँ नमाजी , मासूम बच्चों , मुसाफिरों के साथ इमाम साहब और मोअज्जिन भी इफ़्तार कर लेंगे और आपको बेहिसाब सवाब मिलेगा।

उम्मीद है आप ये अमल जरूर करेंगे….इंशा अल्लाह

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