गोरखपुर

इस्लाम में ख़्वातीन की बुलंदो बाला अज़मत व इज़्ज़त: मुफ़्तिया फिरदौस

ख़्वातीन पर्दा करें और सादगी से गुजारें ज़िदंगी

गोरखनाथ में जलसा-ए-ख़्वातीन

गोरखपुर। दीन-ए-इस्लाम ने औरत को समाज में एक बेहतरीन मुक़ाम अता करके उसकी इज़्ज़त में इज़ाफ़ा किया है। दीन-ए-इस्लाम में ख़्वातीन की बुलंदो बाला अज़मत है।

शनिवार को जिला गया, बिहार की मुफ़्तिया फिरदौस जबीं अमजदी ने अराकीने अंजुमने ख़्वातीने इस्लाम कमेटी की ओर से इमाम बारगाह पुराना गोरखपुर गोरखनाथ में जलसा-ए-ख़्वातीन से ख़िताब करते हुए बतौर मुख्य अतिथि उक्त विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि दीन-ए-इस्लाम ने बेटी की बेहतरीन तरबियत पर जन्नत की खुशख़बरी, बेहतरीन बीवी को नेमत और माँ के क़दमों तले जन्नत कह कर औरत की अज़मत को बुलंदो बाला कर दिया है। आज समाज में औरत की आज़ादी के नाम पर औरतों को घरों से निकाल कर फैशन परस्ती, आज़ादी का नारा के ज़रीया औरत का सुकून छीन लिया है। आजकल मुस्लिम लड़कियों की गैर मुस्लिम लड़कों के साथ इश्क़ो आशिक़ी और शादी ब्याह के वाक़्यात मंज़रे आम पर आ रहे हैं। ये दरअसल दीन-ए-इस्लाम से दूरी का नतीजा हैं। ईमान चला गया तो दुनिया व आख़िरत की ज़िंदगी नाकाम हो जाएगी। माएं घरों में अपनी बच्चियों को इस्लामी माहौल पर अमल करने की तरफ़ राग़िब करें। अल्लाह और पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीके पर कारबन्द रहने की तलक़ीन करें।

विशिष्ट अतिथि मुफ़्तिया ग़ाजिया खानम अमजदी ने कहा कि अल्लाह एक है। सिर्फ वही इबादत के लायक है। पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उसके रसूल हैं। लड़कियां दीनी तालीम के साथ आला असरी तालीम भी हासिल करें, मगर इस्लामी तहज़ीबो तमद्दुन को थामे रखें।

विशिष्ट अतिथि आलिमा नाजिश फ़ातिमा शम्सी ने अल्लाह के हुक्म को मानने, पैग़ंबर-ए-आज़म की सुन्नतों पर अमल करने, ख़्वातीन से पर्दा करने के साथ ही सादगी से ज़िदंगी गुजारने की नसीहत की।

आलिमा तमन्ना जबीं व आलिमा गुलफिशां ने हम्दो नात पेश की। मुफ़्तिया तमन्ना नूरी अमजदी ने संचालन किया। अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो शांति व खुशहाली की दुआ मांगी गई। जलसे में बड़ी संख्या में औरतों ने शिरकत किया।

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