गोरखपुर

डॉ० आसिम आज़मी व मुफ्ती अख्तर हुसैन सब्जपोश अवॉर्ड से सम्मानित

  • पैग़ंबरे इस्लाम ने तौहीद, सहिष्णुता, सौहार्द व इंसानियत का पैग़ाम दिया: मौलाना जहांगीर

गोरखपुर। मंगलवार को खानकाहे सब्जपोश की ओर से सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार के मैदान में मोहसिन-ए-आज़म कांफ्रेंस हुई। शिक्षक व लेखक डॉ. मो. आसिम आजमी व मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी को दीनी शिक्षा में अहम योगदान देने के लिए’सब्जपोश अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। अचानक बीमार हो जाने के कारण डॉ. आसिम आजमी कांफ्रेंस में शिरकत नहीं कर सके। उनके प्रतिनिधि के तौर पर यह अवॉर्ड मुफ्ती अजहर को सौंपा गया। सम्मानित जनों को फूल, सम्मान पत्र व शील्ड पेश किया गया। हाजी रफीउल्लाह व सफीउल्लाह को मस्जिद की खिदमत करने और हाफिज सैफ अली व हाफिज अशरफ रजा को मकतब में बेहतर शिक्षण कार्य के लिए तोहफों से नवाजा गया। मकतब इस्लामियात जाफरा बाजार के बच्चों को कांफ्रेंस में विशेष प्रदर्शन करने पर ईनाम दिया गया।

मुख्य वक्ता मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने कहा कि हमारे समाज में उसी वक्त अमन हो सकता है, जब हम अच्छे और नेक बनेंगे। हर शख़्स खुद को सुधार ले तो समाज ख़ुद ही अच्छा हो जाएगा। समाज को मजबूत करने के लिए आपस में भाईचारा व मोहब्बत कायम करनी होगी। पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तौहीद, धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक, सौहार्द व इंसानियत का पैग़ाम दिया। आप तौहीद, इंसानियत के तरफदार और परस्पर प्यार के पैरोकार थे, इसलिए आपने मोहब्बत का पैग़ाम दिया।

विशिष्ट वक्ता नायब काजी मुफ़्ती मो. अज़हर शम्सी ने कहा मुसलमान ज्ञान के हर क्षेत्र में आगे थे। चाहे उसका सम्बन्ध धार्मिक ज्ञान से हो या आधुनिक ज्ञान से। धार्मिक ज्ञान में वे मुफक्किर-ए-इस्लाम और वलीउल्लाह थे, तो आधुनिक ज्ञान में उनकी गणना दुनिया के बड़े वैज्ञानिकों में होती थी, यही कारण था कि अल्लाह ने धार्मिक और आधुनिक ज्ञान के कारण उन्हें बुलंदियों पर बिठा दिया था। तब हम तादाद में कम थे, लेकिन ज्ञान के हुनर-ओ-फन में हमारा कोई सानी नही था। हमारे ज्ञान व कला को देख कर विरोधी तक हमारी प्रशंसा करने के लिए मजबूर हो जाते थे। आज हम करोड़ो में हैं लेकिन ये फन हमारे हाथों से निकलता जा रहा है, क्यूंकि हमारा सम्बन्ध अल्लाह और उसके रसूल से हटता जा रहा है।

नात-ए-पाक कासिद रजा इस्माईली, कैसर रजा, मौलाना महमूद रज़ा, हाफिज रहमत अली ने पेश की। अंत में सलातो सलाम पढ़ कर दुआ मांगी गई। कांफ्रेंस में कारी मोहम्मद अनस रजवी, सैयद तारिक सब्जपोश, सैयद अली सब्जपोश, सैयद जव्वाद सब्जपोश, मौलाना मकसूद, आमिर अली निजामी, कारी सरफुद्दीन, मो. इरफ़ान, आसिफ अहमद, युसूफ, आदिल अमीन, मुनाजिर, हाफिज अलकमा, आरिफ सामानी, तारिक सामानी, सैयद नदीम अहमद आदि ने शिरकत की।

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