जीवन चरित्रधार्मिक

हज़रत ए उवैस करनी र0 अ0 (पोस्ट 2)

लेखक: मह़मूद रज़ा क़ादरी

हुलीय ए मुबारक

आप रजियल्लाहु अन्हो बदन ए मुबारक कमजोर और दुबला पतला, कद लंबा, रंग सफेद,मायल गन्दुमी, कंधे फुराख, (चौड़ा) आंखें सीयाह, (काली)नज़र अक्सर सजदा गाह पर रहती,चेहरे मुबारक गोल,और पुर हैबत दाढ़ी घनी,सर के बाल उलझे हुए अक्सर गर्द व गुबार से लिपटे हुए और लिबास में आमतौर पर दो कपड़े शामिल होते एक उँट के बालों का कंबल और दूसरा पायजामा
एक मर्तबा आप रजियल्लाहु अन्हो बर्स के बीमारी में मुबतला हो गए तो बारगाह ए इलाही में दुआ फरमाई या इलाही मुझसे बीमारी दूर फरमा अलबत्ता निशान मेरे जिस्म पर बाकी रहे ताकि मैं तेरी रहमत और शफकत को हमेशा याद करता रहूं बाय हाथ कि हथेली (देखा गया और दिगर पहलू) पर एक दिरहम के बराबर सफेद निशान था।

तालीम व तरबीयत

अगर चे उवैस करनी रजियल्लाहु अन्हो ने जाहिरी तालीम हासिल नहीं की मगर नबी ए पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मोहब्बत और अकीदत के रूहानी तवस्सुल से ना सिर्फ आप रजियल्लाहु अन्हो सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रूहानी तरबीयत याफता थे बल्कि सरवरे कायनात सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जनाबत में आप रजियल्लाहु अन्हो को मर्तबे महबूबीयत भी हासिल था जैसा कि हजरत ए अल्लामा अब्दुल कादिर अर्बली रहमतुल्लाह अलैहि अपनी मशहूर किताब (तफरीहुल खातिर में तहरीर) फरमाते हैं कि हमें यह मालूम होना चाहिए कि कामिल इंसानों की अरवाह का फ़ैज़ कई तरह से होता है। आलम ए जाहिर में बिल मुशाफे तरबीयत और तरबीयत कभी मुर्बी अपनी जिंदगी में करता है और कभी मरने के बाद पहला जैसे सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हयात ने अपनी जाहिरी हयाते मुबारका में
हजरत ए उवैस करनी रजियल्लाहु अन्हो कि और हजरत जाफर सादिक रजियल्लाहु अन्हो ने हजरत ए अबू यजी़द बिसतामी रहमतुल्लाह अलैही कि तरबीयत फरमाई दुसरा, वह तरबीयत जो नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जाहिरी पर्दा फरमाने के बाद रहे हैं। तिसरा आलम ए ख्वाब हमें तरबीयत, चौथा अरवाहे मुजर्दा की तरबीयत करना जैसे नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कि रूहे मुबारक ने तमाम अम्बिया ए किराम कि तरबीयत फरमाई उसे तरबीयत ए रूह कहा जाता है। „

सादगी
हजरत ए उवैस करनी रजियल्लाहु अन्हो ने दुनिया को अपने ऊपर इस कदर तंग फरमा लिया था कि लोग उन्हें दीवाना समझते आप रजियल्लाहु अन्हो के लिबास, खुराक,गुफ्तार गर्ज की हर हर अदा में सादगी झलकती थी आप रजियल्लाहु अन्हो ने ना दुनिया की कोई चीज इकट्ठी की ना दुनिया से कुछ उठाया
सादगी ही की वजह से लड़के आप रजियल्लाहु अन्हू को दीवाना समझकर छेड़ते और ढेले मारते तो आप रजियल्लाहु अन्हो फरमाते बच्चों छोटी छोटी कंकरिया मारो ताकि मेरा खून ना बहे और मैं नमाज रोजा से आजिज ना हो जाऊं
आप रजियल्लाहो अन्हो का जाहिरी हुलिए मुबारक ऐसा सादा था कि बच्चों के अलावा बड़े भी आप रजियल्लाहु अन्हो का मजाक उड़ाया करते थे।

खुराक

हजरत ए उवैस करनी रजियल्लाहु अन्हो दुनिया से बिल्कुल दिलबर दस्ता हो गए थे और उन्होंने तर्के दुनिया पर बड़ी बड़ी सखतीयां बर्दाश्त की थीं लोगों उन्हें दीवाना समझते थे
आप रजियल्लाहु अन्हो की कौम के चंद लोगों ने एक अलग मकान बनवाया था आप रजियल्लाहु अन्हो उसी मकान में रहते आजा़न ए फज़र के वक्त घर से निकल जाते और नमाजे़ ईशा पर वापस तशरीफ लाते वापसी से रास्ता पर छुहारों की गुटलियां चुनकर लाते और उन्हें खा लिया करते कुछ छुहारे इफ्तार के लिए रख देते अगर इतने छुहारे या खजूरें मिल जाती जो खुराक को किफायत करते तो बेहतर खस्ता खजूरें सदका फरमा देते रात होते ही तमाम सामान जो आप रजियल्लाहु अन्हो पास होता मुस्तहकीन में तकसीम फरमा देते थे।

(आगे पोस्ट जारी रहेगा।

शोऐब रज़ा

विश्व प्रसिद्ध वेब पोर्टल हमारी आवाज़ के संस्थापक और निदेशक श्री मौलाना मोहम्मद शोऐब रज़ा साहब हैं, जो गोरखपुर (यूपी) के सबसे पुराने शहर गोला बाजार से ताल्लुक रखते हैं। वे एक सफल वेब डिजाइनर भी हैं। हमारी आवाज़

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