धार्मिक

दियोबन्दी काफिर कियों?

लेखक: खलील् अहमद फैज़ानी

लप्रशन:
दियोबन्दयो की तक़्फिर् कियों की जाती है ?इन की कुछ कुफ्रि बातें बताएं और उनका हुक्म ब्यान करें
उत्तर ::
जो शख्स जरुरियात् ए दीन में से किसी एक का इनकार् करेगा या उस में अपनी मन मानी करेगा तो वो शख्स काफिर है
,दुर्रे मुख्तार् ,ये एक महत्वपूर्ण पुस्तक है देयोबन्द् वाले भी इस किताब को पड़ते पढ़ाते हैं उस में लिखा हुआ है
, ان انکر بعض ما علم من الدین ضرورہ کفر بھا , (درمختار ,ج:۱,ص:۱۷۵)
इसका उनुवाद् ये है कि अगर कोई वयक्ति दीन की किसी जरूरी बात का इंकार करदेता हे तो वो काफिर हे
उदाहरण: ज़ैसे कोई अगर कियमत् या जन्न्त व् दोजख् का इंकार करदे तो वो शख्स जफिर् होजाता है इसी तरह इन के आलावा अधिक मात्रा में और भी कई चीजेंं हैं कि अगर कोई वयक्ति उन का इंकार या उनकी निंदा करते है तो वो भी काफिर होगा
अब इन के अक़िदे देखते हैं कि इन लोगों ने ऐसा किया कहा कि इन पर इतना सख्त हुक्म लगा
आइये देखेते हैं
इल्म गेब् अल्लाह ताला की नबियोन् को हसिल् होता है अल्लाह ताला की अता से अब अगर कोई इसका इंकार करते है या निंदा करते है तो उस पर सख्त हुक्म लगेगा
अशरफ् अली थानवी ने अपनी पुस्तक ,हिफ्जुल् ईमान ,में हुजूर सल्लाहोताला अलय् हे वसल्ल्म के लिए कुल इल्म ए गेब् का इंकार करते हुए सिर्फ कुछ इल्म ए गेब् को साबित किया फिर कुछ इल्म गेब् के बारे में इस प्रकार लिखा ,,इस में हुजूर सल्लाहोताला अल्य्हे वसल्ल्म की किया तख्सीस् है ऐसा इल्म तो जेद व् उमर बल्कि हर बच्चे व् मजनू परन्तु तमाम हेवानात् व् बहाईम् के लिए भी प्राप्त हे (हिफ्जिल् ईमान ,पेज:8)
इन लाइनों में उसने माज्ल्लाह हमारे प्यारे नबी सल्ल्लाहो अल्य्हे वसल्म् के ज्ञान के सम्न्द्रो को जानवरों
बल्कि चओपयोन् की तरह कहा
ये हजरत थोड़ी बहुत बलगत् पड़े हों तो इन्हें पता होना चाहिए कि इन शब्दों में तस्बि दी गई है
और ये भी है कि तस्बि या तो अच्छी वास्तु से दी जाती है या खराब से
अब यहाँ पर उसने खराब तसबि दी जिस बुनियाद् पर वो काफिर हुआ
खलील् अब्न्बेथ्वि को उठाइये वो की लिखता है ।
बरहिन् ए कतिआ में लिखता है कि ,,शैतान व् मल्कुल् मौत को ये वुसत् नस से साबित है फख्रे आलम की वुसत् इल्म कौनसी नस ए कताइ हे जिस से तमाम नुसोस् रेद् करके एक सिर्क् साबित करना है (पेज :51)
इन् शब्दों के अर्थ ये हुआ कि सेतान् का इल्म हुजूर सल्लहो अल्य्हे वसल्ल्म के से ज्यादा है ,रब की पनाह,
हमारे नबी सल्लाहो अल्य् हे वस्ल्लम् के तालुक से ऐसे ऐसे घिनव्ने अक़िदे इनकी पुस्तको में भरे पड़े हैं
एक तलाश् करोगे अनेक प्राप्त होजाए गे
असरफ अली थानवी हो य क़ासिम ननोत्वि अन्बेह्ति या कोई और ऐसे बेहूदा अक़िदिओ की भरमार है

ये सिर्फ आपको दिखाने के लिए शार्ट टाइम में इतना ही ल्खि पाया वरना इन के रद् में तो हमारे बुज्र्गोम् ने हजारों किताबें लिखी और लिख भी रहे हैं ।
अगर और ज्यादा इनके तालुक से पता करना है तो इन्फॉर्म कीजियेगा
पूरि पुस्तक है तैयार कर देंगे इंसा अल्लाह ताला अज्ज्वा जल्लाह्

शोऐब रज़ा

विश्व प्रसिद्ध वेब पोर्टल हमारी आवाज़ के संस्थापक और निदेशक श्री मौलाना मोहम्मद शोऐब रज़ा साहब हैं, जो गोरखपुर (यूपी) के सबसे पुराने शहर गोला बाजार से ताल्लुक रखते हैं। वे एक सफल वेब डिजाइनर भी हैं। हमारी आवाज़

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