गोरखपुर

हजरत उमर मुसलमानों के दूसरे खलीफा व इमाम : मुफ्ती अजहर

सत्य के लिए लड़ते हुए शहीद हुए इमाम हुसैन : अनस नक्शबंदी

जाफरा बाजार में विशेष दीनी संगोष्ठी

गोरखपुर। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में मुसलमानों के दूसरे खलीफा हजरत उमर रदियल्लाहु अन्हु के उर्स-ए-पाक के मद्देनजर विशेष दीनी संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत मुदस्सिर कुरैशी ने की। नात-ए-पाक जीशान कुरैशी ने पेश की।

मुख्य वक्ता शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हजरत सैयदना उमर रदियल्लाहु अन्हु मुसलमानों के दूसरे खलीफा व दूसरे इमाम हैं। आप इमामत में भी दूसरे नंबर पर हैं और खिलाफत में भी। हजरत उमर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रमुख चार सहाबा (साथियों) में से हैं। आप मुसलमानों के पहले खलीफा हजरत सैयदना अबू बक्र रदियल्लाहु अन्हु के बाद मुसलमानों के दूसरे खलीफा चुने गए। पैगंबर-ए-इस्लाम ने आपको फारूक (सही व ग़लत में फ़र्क करने वाला) की उपाधि दी। पैगंबर-ए-इस्लाम के उम्मतियों में आपका रुतबा हजरत अबू बक्र के बाद आता है। हजरत उमर जब खलीफा हुए तब एक नये दौर की शुरुआत हुई। दीन-ए-इस्लाम का खूब विस्तार हुआ। हजरत उमर की अदालत (न्यायप्रियता) जग जाहिर है। हजरत उमर अहले बैत से बहुत मुहब्बत करते थे। आपकी शहादत 1 मुहर्रम 24 हिजरी को हुई।

अध्यक्षता करते हुए कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि जालिम यजीद के अत्याचार बढ़ने लगे तो उसने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन से अपने कुशासन के लिए समर्थन मांगा और जब हजरत इमाम हुसैन ने इससे इंकार कर दिया तो उसने इमाम हुसैन को कत्ल करने का फरमान जारी कर दिया। कर्बला के तपते रेगिस्तान में तीन दिन के भूखे प्यासे हजरत इमाम हुसैन व उनके जांनिसारों को शहीद कर दिया गया। अहले बैत पर बहुत जुल्म किए गए।

अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान, तरक्की व भाईचारे की दुआ मांगी गई। संगोष्ठी में हाफिज रहमत अली निजामी, नेहाल अहमद, एसएफ अहमद, उबैद रजा, रूशान सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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