जीवन चरित्रधार्मिक

हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम

लेखक: मह़मूद रज़ा क़ादरी

शजरा-ए-नस्ब: इदरीस अलैहीस सलाम–> बिन यरद –> बिन महलाईल–> बिन क़यान –> बिन अनूष –> बिन शीस –> बिन आदम अलैहीस सलाम

जब यरद की वफ़ात का वक़्त क़रीब आया तो उन्होने अपना जानशीन अपने बेटे ख़नूख़ यानि इदरीस अलैहीस सलाम को बनाया।

अल्लाह तआला ने आपको अपने ज़माने के तमाम इन्सानों के लिये नबी बनाकर भेजा और शीस अलैहीस सलाम के बाद आपको ही नुबूवत अता हुई आप पर तीस सहीफ़े नाज़िल हुए।

क़ुरआन मजीद में सूरह मरियम में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है-

“और याद करो इदरीस को बेशक वो सिद्दीक़ और ग़ैब की ख़बर देने वाले थे

और हमने उन्हें बुलन्द मक़ाम पर उठा लिया।”

अल्लाह तआला ने आपको “सिद्दिक़ियत” के लक़ब से नवाज़ा और आपको “सुआलेह” नबी के नाम से पुकारा। आपका नस्ब हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जाकर मिलता है।

आपकी पैदाइश हज़रत आदमے के ज़माने में ही हो गई थी। आपने आदम अलैहीस सलाम की ज़िन्दगी के तीन सौ आठ साल देखे।

क़लम से लिखने की शुरुआत और इल्मे रमल की ईजाद

आप क़लम से लिखने वाले पहले शख़्स हैं इसके अलावा आपने “इल्मे रमल” ईजाद किया। यह एक इल्म है जिसमे ज़मीन पर लकीरे खीँच कर छिपी हुई बातों के बारे में मालूम किया जाता है। इससे मुताल्लिक़ एक हदीस में है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जब इल्मे रमल के बारे में पूछा गया तो आपने फ़रमाया कि यह एक पैग़म्बर थे जो रेत पर ख़त खींचा करते थे बस जिसका ख़त इनके मुताबिक़ हो जाये उसे अच्छी चीज़ों का इल्म हो जाता है। इसी की वजह से आपका लक़ब “हरमतुल हरामसा” पड़ा। जिसके मानी है “इल्मे नजूम यानि सितारों के इल्म का माहिर।”

कपड़े को सीकर पहनना

आपने ही सब से पहले कपड़े को सीकर पहना। इससे पहले जिस्म छुपाने के लिये जानवर की खाल और ऊन की चादर जिस्म छुपाने के लिये इस्तेमाल की जाती थी।

वाज़ और ख़िताबत की शुरुआत

सबसे पहले वाज़ और ख़िताबत की शुरुआत भी आपने ही की। जब हज़रत आदम अलैहीस सलाम इस दुनिया से रुख़्सत हुऐ तो आपने अपनी क़ौम को जमा किया और उनके सामने वाज़ किया जिसमे आपने अल्लाह तआला की फ़रमांबरदारी और शैतान की नाफ़रमानी का हुक्म दिया और क़ाबील की औलाद से न मिलने की नसीहत की। इस तरह आपने बक़ायदा वाज़ करने की बुनियाद डाली।

नेक अमल में पहलः-

एक बार आपका दोस्त फ़रिश्ता आपके पास “वही” लेकर आया कि कुल “औलादे आदम” के बराबर आपके आमाल हैं। आपने सोचा मैं इससे बढ़कर नेक आमाल करूँ तो आपने फ़रिश्ते से कहा कि “मलाकुल मौत” से कहो कि वह मेरी रूह क़ब्ज़ करने में जल्दी न करे ताकि मैं और नेक आमाल कर सकूँ।

इस फ़रिश्ते ने आपको परों पर बिठा कर चौथे आसमान पर पहुँचा दिया। वहाँ पहुँचे तो मलाकुल मौत को देखा।

फ़रिश्ते ने मलाकुल मौत से उनकी सिफारिश की- मलाकुल मौत ने पूछा – वह कहाँ हैं? फ़रिश्ते ने जवाब दिया – मेरे बाज़ू पर बैठे हुए हैं।

मलाकुल मौत ने कहा- “सुब्हानल्लाह” मुझे अभी हुक्म हुआ कि इदरीस अलैहीस सलाम की रूह चौथे आसमान पर क़ब्ज़ करो। मैं इस फ़िक्र मे था कि वो ज़मीन पर हैं यह कैसे मुमकिन है कि मैं उनकी रूह चौथे आसमान पर क़ब्ज़ करूँ।

लिहाज़ा आपकी रूह चौथे आसमान पर क़ब्ज़ कर ली गई। इसी लिए अल्लाह तआला ने सुूरह मरियम में इरशाद फरमाया कि- “हमने उन्हें बुलन्द मुक़ाम पर उठा लिया”।

कुछ उलमा-ए-किराम का मानना है कि उनकी रूह क़ब्ज़ नही की गई बल्कि वह ज़िन्दा ही आसमान पर हैं। लेकिन सही यही है कि उनकी चौथे आसमान पर रूह क़ब्ज़ की गई। (वल्लाहु आलम)

हज़रत इदरीस अलैहीस सलाम के वारिस

हज़रत इदरीस अलैहीस सलाम के बाद इनके बेटे मतूशलख़ इनके जानशीन बने। ये अपने बाप-दादा के तरीक़े पर चले। मतूशलख़ ने 135 साल की उम्र में अरबा बिन्ते अज़ाज़ील से शादी की जिनसे इनके बेटे लमक पैदा हुए।

अल्हम्दु लिल्लाह हज़रत इदरीस अलैहीस सलाम का बाब मुकम्मल हुआ।

अम्बिया-ए-किराम के बारे में कुछ ग़लत रिवायात चली आ रही हैं हमारी कोशिश है कि सही मालूमात आप तक पहुँचाई जाये। जो तारीख़ का हिस्सा आप तक पहुँचाया गया उसमें भी यह एहतियात बरती गई है बाक़ी सब कुछ बेहतर जानने वाला अल्लाह है अगर कोई ग़लती हो गई हो तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमे माफ़ फरमाये आमीन!

शोऐब रज़ा

विश्व प्रसिद्ध वेब पोर्टल हमारी आवाज़ के संस्थापक और निदेशक श्री मौलाना मोहम्मद शोऐब रज़ा साहब हैं, जो गोरखपुर (यूपी) के सबसे पुराने शहर गोला बाजार से ताल्लुक रखते हैं। वे एक सफल वेब डिजाइनर भी हैं। हमारी आवाज़

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