गोरखपुर

अल्लाह को प्यारी है कुर्बानी : मुफ्ती मेराज

क़ुर्बानी पर दर्स का अंतिम दिन

गोरखपुर। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती में क़ुर्बानी पर चल रहे दर्स के अंतिम दिन शनिवार को मुफ्ती मेराज अहमद क़ादरी ने कहा कि एक मशहूर हदीस है कि नबी-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि सींग वाला मेढ़ा लाया जाए जो स्याही में चलता हो (तीन बार इरशाद फरमाया) और स्याही में बैठता हो, पेट स्याह हों और आंखें स्याह (काली) हो, कुर्बानी के लिए हाजिर किया गया। नबी-ए-पाक ने फरमाया छुरी लाव, फिर फरमाया इसको पत्थर पर तेज कर लो। फिर नबी-ए-पाक ने छुरी ली और मेढ़े को लिटाया और उसे जिब्ह किया और दुआ की या अल्लाह इसको मेरे व मेरी आल और उम्मत की तरफ से कबूल फरमा। लिहाजा जो लोग हैसियत वाले हों वह अपनी तरफ से कुर्बानी करवाने के बाद नबी-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ से भी कुर्बानी करवाएं तो बेहतर है।

उन्होंने बताया कि तकबीरे तशरीक वाजिब हैं, जरूर पढ़ें। मुसलमानों के लिए बेहतर है कि दसवीं जिलहिज्जा को नमाज से पहले कुछ न खाएं। गुस्ल करें। साफ सुथरे या नये कपड़े पहनें। खुश्बू लगाएं। ईदगाह को तक्बीरे तशरीक बुलंद आवाज से कहते हुए एक रास्ते से जाएं और दूसरे रास्ते से वापस आएं फिर कुर्बानी करें।

उन्होंने बताया कि हदीस में आया है कि नबी-ए-पाक ने फरमाया कि यौमे जिलहिज्जा (10वीं जिलहिज्जा) में इब्ने आदम का कोई अमल अल्लाह के नजदीक कुर्बानी करने से ज्यादा प्यारा नहीं है। दूसरी हदीस में आया है कि नबी-ए-पाक ने फरमाया कि जिसे कुर्बानी की ताकत हो और वह कुर्बानी न करे, वह हमारी ईदगाहों के करीब न आए।

कुर्बानी अदा करने का तरीका बताया

कारी मोहम्मद अनस रजवी ने बताया कि कुर्बानी के जानवर को बाएं पहलू पर इस तरह लिटाएं कि किब्ला को उसका मुंह हो और अपना दाहिना पांव उसके पहलू पर रख कर जल्द जिब्ह करें। अलबत्ता जिब्ह से पहले दुआ पढ़ें फिर ‘‘बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर’’ पढ़ कर जिब्ह करें फिर दुआ पढ़ें ‘‘ अल्लाहुम्म तक़ब्बल मिन्नी कमा तक़ब्बल त मिन खलीलि क इब्राहीम अलैहिस्सलाम व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम’’ अगर कुर्बानी अपनी तरफ से हो तो ‘‘मिन्नी’’ और अगर दूसरों की तरफ से हो तो ‘‘मिन्नी’’ के बजाए ‘‘मिन’’ कह कर उसका नाम लें।

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