गोरखपुर

रोज़ेदार इबादत के साथ कर रहे ईद की तैयारी

घरों में क़ुरआन शरीफ़ का तर्जुमा पहुंचाने का सिलसिला जारी

गोरखपुर। मंगलवार को 24वां रोज़ा अल्लाह की इबादत में बीत गया। रमज़ान के बचे रोज़ों में अल्लाह के बंदों की इबादत बढ़ गई है। रोज़ा करीब साढ़े चौदह घंटे से अधिक का हो चुका है लेकिन रोज़ेदारों की इबादत में कोई कमी नहीं है। सुबह शाम तिलावते क़ुरआन का दौर जारी है। बंदे अपनी गुनाहों की माफ़ी मांग रहे हैं। तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है। मस्जिदों में एतिकाफ जारी है। शबे कद्र की तीसरी ताक रात में खूब इबादत व तिलावत हुई। तंजीम कारवाने अहले सुन्नत के कारी मोहम्मद अनस रज़वी, हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी, हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी आदि क़ुरआन शरीफ़ का उर्दू, हिंदी व अंग्रेजी तर्जुमा घरों में पहुंचाने में लगे हुए हैं। करीब 200 से अधिक घरों में क़ुरआन शरीफ़ का तर्जुमा ‘कंजुल ईमान’ पहुंचाया जा चुका है। यह सिलसिला पूरे रमज़ान तक चलेगा। ईद का बाज़ार लोगों से भरा हुआ है। ईद की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। मस्जिदों में रमज़ान का विशेष दर्स भी जारी है।

क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत इबादत है: मुफ्ती मेराज

मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद क़ादरी ने कहा कि तिलावते क़ुरआन के कुछ आदाब हैं। जिनका तिलावत के समय खास ख्याल रखा जाए ताकि हम अल्लाह के नज़दीक अजरे अज़ीम के हकदार बनें। तिलावत एक इबादत है। लिहाज़ा रिया व शोहरत के बजाए इससे सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए। सुकून के साथ ठहर-ठहर कर और अच्छी आवाज़ में तिलावत करें। रमज़ान में तिलावत करने का सवाब अधिक मिलता है।

क़ुरआन-ए-पाक के अहकाम व मसाइल पर अमल करें: नायब क़ाज़ी

नायब क़ाज़ी मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि तिलावते क़ुरआन के समय अगर आयतों के मानी पर गौर व फिक्र करके पढ़ें तो बहुत ही बेहतर है। क़ुरआन-ए-पाक के अहकाम व मसाइल पर खुद भी अमल करें और उसके पैग़ाम को दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश करें। अल्लाह हम सबको रोज़ा और तिलावते क़ुरआन की बरकत से तक़वा वाली ज़िन्दगी गुजारने वाला बनाए।

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