गोरखपुर

दीन-ए-इस्लाम की मंशा दुनिया में शांति स्थापना की है: कारी शराफ़त

तुर्कमानपुर में जलसा-ए-ग़ौसुलवरा

गोरखपुर। शहनाई गली तुर्कमानपुर में जलसा-ए-ग़ौसुलवरा का आयोजन हुआ।
क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफ़िज़ मो. अशरफ़ रज़ा ने की। नात-ए-पाक मोहम्मद अफ़रोज़ क़ादरी ने पेश की। संचालन हाफ़िज़ अज़ीम अहमद नूरी ने किया।

मुख्य अतिथि कारी शराफ़त हुसैन क़ादरी ने कहा कि ‘औलिया-ए-किराम’ ने अपना पूरा जीवन अल्लाह, रसूल और इंसानियत की सेवा में गुजार कर दीन और दुनिया दोनों में अपना नाम रौशन किया। उन्हीं में एक अज़ीम शख़्सियत ग़ौसे आज़म हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी अलैहिर्रहमां की है। जिन्होंने मख़्लूक को शरीअत, तरीकत, मारफ़त व हक़ीक़त का जाम पिलाया। इंसानों को तौहीद व राहे हक़ पर चलने का पैग़ाम दिया। अल्लाह के वलियों में सबसे ऊंचा मरतबा हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी यानी ग़ौसे आज़म का है। हिन्दुस्तान में दुनिया के सबसे ज्यादा मुसलमान अन्य समाजों के साथ शांतिपूर्वक रह रहे है तो वह दीन-ए-इस्लाम की तालीम व औलिया-ए-किराम का फ़ैजान है। दीन-ए-इस्लाम की मंशा दुनिया में शांति स्थापना की है।

विशिष्ट अतिथि कारी निसार अहमद निज़ामी ने कहा हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी ने क़ादरिया सूफी परंपरा की शुरूआत की। आपका बड़ा रुतबा है। आप सारे वलियों के सरदार हैं। आपके दर से कोई मायूस नहीं जाता।

अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान व तरक्की की दुआ मांगी गई। शीरीनी बांटी गई। जलसे में बिस्मिल्लाह, इरशाद अहमद नूरी, दानिश रज़ा अशरफ़ी, हाफ़िज़ साहिबे आलम, हाफ़िज़ शाहिद अली, हाफ़िज़ सैफ़ अली, हाफ़िज़ आरिफ रज़ा आदि ने शिरकत की।

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