किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के नेताओं के फेसबुक और ट्विटर अकाउंट बंद होने शुरू हो गए है। इसके चलते संगठन के नेताओं को अपनी आवाज उठाने में अब मुश्किल आने लग गई है। किसानों ने सीधा आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया कंपनियां और सरकार किसानों को अपनी आवाज उठाने के संवैधानिक अधिकार को छीन रही है, जो कि लोकतंत्र का अपमान है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि फेसबुक ने उनका अकाउंट तीसरी बार बंद कर दिया है। जबकि ट्विटर पर भी उनका अकाउंट दूसरी बार बंद किया गया है। उन्होंने कहा कि वह किसानों के हकों की आवाज को जन जन तक पहुंचाने और अपनी गतिविधियों की सूचनाएं जन जन तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया के इन अकाउंट का उपयोग कर रहे थे। इसी तरह उनके संगठन के आधे दर्जन के करीब अन्य सदस्यों के अकाउंट भी बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से बार-बार अकाउंट तैयार किए जाते हैं। सुनियोजित राजनीति के तहत बार-बार इन्हें बंद कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन ने इस संबंध में भारत सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को भी पत्र भेजे हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर एक व्यक्ति को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। परंतु उनकी आवाज को संविधान के उलट दबाने की कोशिश की जा रही हैं, जिस को सहन नहीं किया जाएगा।
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