गोरखपुर। कारी मोहम्मद अनस रज़वी ने बताया कि बहुत से लोग इफ्तार में इतने मशगूल होते हैं कि नमाज़ बाजमात छूट जाती है। यह भी बड़ी कोताही है। जमात को छोड़ देना सिर्फ थोड़े से खाने की वजह से अच्छी बात नहीं। हालांकि लोगों को यह पता है कि नमाज़ के बाद भी खा सकते थे मगर इतना सब्र भी मुश्किल हो जाता है। इसी तरह कुछ लोग इफ्तार में इतना पेट भरकर खाते हैं कि फिर नमाज़ में खड़ा होना दुश्वार हो जाता है और नमाज़ें यहां तक कि तरावीह भी गफलत में गुजरती है। इससे बचना चाहिए। अल्लाह का फ़ज़ल वह खजाना-ए-रहमत है कि जिसे मिल जाए उसकी दीन व दुनिया संवर जाये। अल्लाह चाहता है कि इंसान उसका इबादतगुजार और इताअत करने वाला बंदा बने। इसलिए अल्लाह ने इंसान में सिफाते बंदगी पैदा करने के लिए कुछ फरायज इंसान के जिम्मे लगाए हैं। रोज़ा भी उन्हीं फरायज में से एक है।
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