धार्मिक

रोज़ा का बयान (क़िस्त 4)

हदीस शरीफ़:
इमाम अहमद और बहक़ी रिवायत करते हैं कि
हुज़ूर ने फ़रमाया:
रोज़ा सिपर (ढाल) है और दोज़ख़ से हिफ़ाज़त का मज़बूत क़िला, इसी के क़रीब क़रीब जाबिर व उस्मान बिन अबिल आस व मआज़ बिन जबल रज़िअल्लाहू तआला अन्हुम से मरवी

हदीस शरीफ़:
अबुल यअला व बहक़ी सलमा बिन क़ैस और अहमद व बज़्ज़ार अबू हुरैरह रज़िअल्लाहू तआला अन्हुमा से रावी के
रसूल्लल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
जिसने अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ल की रज़ा के लिए 1 दिन का रोज़ा रखा अल्लाह तआला उसको जहन्नम से इतना दूर करेगा जैसे कौवे का जब बच्चा था उस वक़्त से उड़ता रहा यहां तक के बूढ़ा होकर मरा।

हदीस शरीफ़:
अबुल यअला तिबरानी अबू हुरैरह रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रावी के रसूलल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
अगर किसी ने 1 दिन नफ़ल रोज़ा रखा और ज़मीन भर उसे सोना दिया जाए जब भी उसका सवाब पूरा न होगा उसका सवाब तो क़यामत ही के दिन मिलेगा।

हदीस शरीफ़:
इब्ने माजा अबू हुरैरह रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रावी के रसूलल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने फ़रमाया:
हर शै के लिए ज़कात है और बदन की ज़कात रोज़ा है और रोज़ा निस्फ़ (आधा) सबर हैं।

हदीस शरीफ़:
निसाई व इब्ने खुज़ैमा व हाकिम अबू उमामा रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रावी हैं कि
अर्ज की या रसूलल्लाह मुझे किसी अमल का हुक्म फ़रमाइए फ़रमाया रोज़ा को लाज़िम कर लो के उसके बराबर कोई अमल नहीं, मैंने अर्ज़ की मुझे किसी अमल का हुक्म फरमाइए इरशाद फ़रमाया रोज़ा को लाज़िम कर लो के उसके बराबर कोई अमल नहीं उन्होंने फिर वही अर्ज़ की वही जवाब इरशाद हुआ।

हदीस शरीफ़:
बुखारी व मुस्लिम व तिरमिज़ी व निसाई अबू सईद रजिअल्लाहू तआला अन्ह से रावी हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:
जो बंदा अल्लाह की राह में 1 दिन रोज़ा रखे अल्लाह तआला उसके मुंह को दोज़ख़ से 70 बरस की राह दूर फ़रमा देगा, और इसी के मिस्ल निसाई व तिरमिज़ी व इब्ने माजा अबू हुरैरा रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रावी और तिबरानी अबू दरदा और तिरमिज़ी अबू उमामा रज़िअल्लाहू तआला अन्हुमा से रिवायत करते हैं फ़रमाया के उसके और जहन्नम के दरमियान अल्लाह तआला इतनी बड़ी खंदक़ कर देगा जितना आसमान व ज़मीन के दरमियान फ़ासला है और तिबरानी की रिवायत अमर बिन अब्सा रज़िअल्लाह तआला अन्ह से है के दोज़ख़ उससे 100 बरस की राह दूर होगी और अबुल यअला की रिवायत मआज़ बिन अनस रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से है के ग़ैरे रमज़ान में अल्लाह की राह में रोज़ा रखा तो तेज़ घोड़े की रफ्तार से 100 बरस की मुसाफ़त (दूरी) पर जहन्नम से दूर होगा।
📚 बहारे शरिअत, हिस्सा 5, सफ़ह 95—-96) पुराना एडीसन, मतबूआ क़ादरी किताब घर, बरेली शरीफ)

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लेखक: मुफ़्ती मुहम्मद ज़ुल्फ़ुक़ार ख़ान, नईमी
अब्दुल्लाह रज़वी क़ादरी
, मुरादाबाद यू०पी० इंडिया

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