गोरखपुर

दीन-ए-इस्लाम अमन व मोहब्बत का धर्म है: नायब काजी

शाही जामा मस्जिद में मुक़द्दस हस्तियों की याद में सजी महफिल

गोरखपुर। गुरुवार को शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह में दीन-ए-इस्लाम की मुक़द्दस हस्तियों की याद में महफिल सजी। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। नात-ए-पाक पेश की गई। उम्मुल मोमिनीन हज़रत सैयदा जवेरिया रदियल्लाहु अनहा, हज़रत ख़्वाजा सैयद मोहम्मद बहाउद्दीन नक्शबंद, हज़रत सैयद मोहम्मद सुलेमान अशरफ़ बिहारी, हज़रत सैयदना इमाम हसन अस्करी रदियल्लाहु अन्हु, हज़रत सुल्तान शेर शाह सूरी अलैहिर्रहमां की रूह को इसाले सवाब किया गया। अवाम के सवालों का जवाब क़ुरआन व हदीस की रोशनी में दिया गया।

मुख्य वक्ता नायब काजी मुफ़्ती मोहम्मद अज़हर शम्सी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम अमनो मोहब्बत का धर्म है। पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ईसाई, यहूदी सहित तमाम धर्म के मानने वालों के साथ बेहतरीन सुलूक किया। उसी का नतीजा है कि आज दुनिया में दीन-ए-इस्लाम का बोल बाला है। दीन-ए-इस्लाम तलवार के जोर पर नहीं बल्कि अच्छे आमाल, इल्म, परेहजगारी, उम्दा किरदार, अमन व मोहब्बत के पैग़ाम की वजह से पूरी दुनिया में फैला। पैग़ंबर-ए-आज़म ने इंसानों को जीने का तरीका बताया, सिखाया और चलाया। सही रास्ते पर चलने की तालीम दी। ईद मिलादुन्नबी हमारे लिए खास है। इस दिन इंसानों के रहनुमाई के लिए पैग़ंबर-ए-आज़म दुनिया में तशरीफ लाए। इसीलिए अल्लाह ने हमें बेहतरीन उम्मत के खिताब से नवाज़ा। हमें चाहिए की हम पैग़ंबर-ए-आज़म की बताई तालीम पर अमल करें। इस दिन हमें हर वह नेक काम करना चाहिए जिससे पैग़ंबर-ए-आज़म खुश हों और हर उस काम से बचें जिससे पैग़ंबर-ए-आज़म नाखुश हों।

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान की दुआ मांगी गई। महफिल में मस्जिद के इमाम हाफ़िज़ मो. आफताब, कारी मो. अनस रज़वी, मो. कासिद इस्माइली, अली हसन निज़ामी, मो. अमन, जलालुद्दीन, इफ्तेखार, आज़ाद, कुतबुल, अरमान, अयान आदि ने शिरकत की।

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