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ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे हुकूमत की साज़िश: नूर अहमद अज़हरी

हाल ही में हुकूमते उत्तरप्रदेश की जानिब से एक हुक्मनामा जारी किया गया कि हम उन मदरसों का सर्वे करेंगे जिन मदरसों की मान्यता नही है उसका विरोध मुल्क के मुस्लिम लीडरों ने और प्रवक्ताओं ने मुखर होकर किया इस पर भी वही लोग चुप रहे जो हमे वोट के वक़्त हमारा शिकार करते हैं और हम आसानी से उनके फेंके गए दानों को चुंगने लगते हैं फिर फंस जाते हैं।
पहली बात तो जिन मदरसों की मान्यता है उनके लिए हुकूमत की क्या पॉलिसी है उसे वाज़ेह किये बिना हुकूमत का ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे ऐलान सन्देह के घेरे में है हुकूमत हर हाल में हमारी शिनाख्त हमारी निशानियों को मिटाना चाहती है याद रखना जिस क़ौम का इतिहास उसके तालीमी इदारे हुकूमत के निशाने पर हों और वह क़ौम तमाशा देखती रहे तो वह क़ौम मिट जाती है मौजूदा हुकूमत में एक ख़ास मुहिम के तहत हमारी अज़ीम निशानियों और विरासत को निशाना बनाया जा रहा है मदरसे तो आरएसएस के निशाने पर उसके जन्म दिन से हैं क्योंकि आरएसएस के गुर्गों को यह खूब मालूम है कि जबतक मदरसे बाक़ी रहेंगे तबतक हम देश को ग़ुलाम नही बना सकते आरएसएस के लोगो को पता है कि अगर यह मदरसे ना होते तो देश अंग्रेज़ो के चुंगल से नही छूटता आरएसएस जानती है कि अगर मदरसे रहे तो कभी भी मौलाना फ़ज़ले हक़ खैराबादी की शक्ल में कोई आलिम नुमुदार हो सकता है इस लिए एक साज़िश के तहत हमारे खिलाफ काम किया जा रहा है आसाम में मदरसों में आतंकवाद के तार कहना अगर सही भी हैं तो यह किसने कहा कि मदरसा तोड़ दिया जाए इससे ज़ाहिर होता है कि दिखाया कुछ जाता है अमल किसी और पर किया जाता है जब अदालतें हैं फैसल नियुक्त हैं फिर पुलिस को यह हक़ क्यों कि वह बुलडोज़र चला कर इंसाफ का गला घोंट दे मदरसे तोड़ना साज़िश मदरसे इस्लाम की निशानी हैं इन्हें तोड़ना इस्लाम पर हमला करने के सिवा कुछ भी नही इससे ज़ाहिर होता है कि इरादा सर्वे का नही मदरसों को बदनाम करने का है योगी जी अगर वाक़ई इंसाफ है तो अपनी हुकूमत के मा तहत चलने वाले सरकारी स्कूलों का सर्वे कराएं जहाँ बच्चों के मुस्तक़बिल को बर्बाद किया जाता है आरएसएस के स्कूलों को कटघरे में खड़ा करें जहां मुसलमानों के ख़िलाफ़ तैयारियों के सिवा कुछ भी नही मदरसे तो इस्लाम सिखाते हैं मदरसे तो क़ुरआन की अज़मत और पैग़म्बरे इस्लाम की बताई हुई बातें आगे बढ़ाने के लिए वुजूद में आये जहाँ इंसाफ और इंसाफ और इंसाफ़ है,हम जानते हैं कि आप इस्लाम और इसलामियात पर हमला करना नही छोड़ेंगे तो आपको भी मालूम है कि हम ऐसे हमलों के खिलाफ देश के कानून के दायरे में रहकर मुखर होकर विरोध करना भी नही छोड़ेंगे मदरसा हमारी बुनियाद है मदरसे के ख़िलाफ़ साज़िश ना क़ाबिले बर्दाश्त है।

नूर अहमद अज़हरी
प्रदेश अध्यक्ष मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

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