गोरखपुर। शहर के उलमा-ए-किराम ने बताया कि शुक्रवार 18 मार्च को शबे बरात पर्व है। इसी के अगले दिन होली है। जहाँ हम वतन भाई होली मनाएंगे वहीं हम इस्लामी भाई रात में जागकर अल्लाह की इबादत करेंगे और दिन में रोज़ा रखेंगे। इस दिन मुसलमान कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ते हैं। वहीं दरगाहों, खानकाहों में हाज़री देने जाते हैं। मस्जिदों में रातभर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं। शबे बरात की तैयारियां शुरु हो गई हैं। घर, मस्जिद, दरगाह व कब्रिस्तान में साफ-सफाई जारी है।
मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी (मुफ्ती-ए-शहर) ने कहा कि पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं जिसमें होली, शबे बरात और रमज़ान साथ-साथ पड़े लेकिन शहर की अमन पसन्द अवाम, उलमा-ए-किराम और जिला प्रशासन की सूझबूझ से सभी पर्व शांति के साथ सम्पन करा लिए गए। हमारे मुल्क की पहचान भी यही रही है। दोनों मज़हब के लोग अपने-अपने पर्व आपसी भाईचारे के साथ प्यार मोहब्बत का पैग़ाम देते हुए मनाएं। कहीं किसी से छोटी मोटी गलती हो जाए तो तूल देने के बजाए उसे नज़रअंदाज़ करें। ऐसे खुराफ़ाती तत्व जो समाज में ज़हर घोलने का काम कर रहे हैं उनसे होशियार रहें।
जिला प्रशासन से सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम करने की मांग करते हुए मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी कहा कि मिलीजुली आबादी में पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था की जाए ताकी अमन बरकरार रहे।
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफ़रा बाज़ार के इमाम हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने कहा कि शबे बरात में मुस्लिम नौज़वान आतिशबाजी बिल्कुल न करें। मां-बाप भी बच्चों को आतिशबाजी करने से रोकें। युवा बाइक स्टंट भी न करें। देर रात तक बाहर न घूमें।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी ने कहा कि शबे बरात में घर व मस्जिद में रहकर इबादत व तिलावत करें। अगले दिन का रोजा रखें। खुराफ़ाती काम न किया जाए। शबे बरात इबादत की रात है न कि घूमने फिरने व गपशप करने की रात। जरूरतमंदों की मदद करें। गरीबों को खाना खिलाएं। प्यार बांटें।



