गोरखपुर

आम-अवाम: क़ुर्बानी से बढ़ती है मोहब्बत व भाईचारगी

गोरखपुर। जमुनहिया बाग गोरखनाथ निवासी मुनाजिर हसन ने कहा कि इस्लाम धर्म में कुर्बानी देना वाजिब है। पैगंबर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व पैगंबर हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का कुरआन व हदीस से साबित सच्चा वाकया ईद-उल-अज़हा पर्व की बनुियाद है। ईद-उल-अजहा पर्व शांति व उल्लास के साथ मनाएं। साफ-सफाई का खूब अच्छी तरह ख्याल रखें। सबके साथ अच्छे से पेश आएं। भाईचारे व मोहब्बत को आम करने का दर्स देती है कुर्बानी।

सूरजकुंड कॉलोनी के सैयद मारूफ अहमद ने कहा कि ईद-उल-अजहा मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस मौके पर मुसलमान नमाज़ पढ़ने के साथ-साथ जानवरों की कुर्बानी देते हैं। इस्लाम धर्म के अनुसार कुर्बानी करना हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है, जिसे अल्लाह ने मुसलमानों पर वाजिब करार दिया है। अल्लाह को पैगंबर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व पैगंबर हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की अदा इतनी पसंद आई कि हर मालिके निसाब पर कुर्बानी करना वाजिब कर दिया। वाजिब का मुकाम फर्ज से ठीक नीचे है। कुर्बानी की रवायत पहले जैसी आज भी कायम है।

खोखर टोला के मोहम्मद जैद मुस्तफाई ने कहा कि क़ुर्बानी एक त्योहार ही नहीं है बल्कि रोजगार का बहुत बड़ा जरिया भी है। तीन दिन तक होने वाली कुर्बानी से जहां गरीब तबके को मुफ्त में गोश्त खाने को मिलता है वहीं मदरसा, पशुपालक, बूचड़-कसाई, पशुओं व चमड़े को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले गाड़ी वालों, चारा व पत्ते बेचने वालों, रोटियां बनाने वाले होटलों एवं चमड़ा फैक्ट्रियों को काफी लाभ होता है। लाखों लोगों का रोजगार कुर्बानी से जुड़ा हुआ है।

सूरजकुंड के सैयद नदीम अहमद ने कहा कि खास जानवर को खास दिनों में कुर्बानी की नियत से जिब्ह करने को कुर्बानी कहते हैं। दीन-ए-इस्लाम में जानवरों की कुर्बानी देने के पीछे एक खास मकसद है। अल्लाह दिलों के हाल से वाकिफ है, ऐसे में अल्लाह हर शख़्स की नियत को समझता है। जब बंदा अल्लाह का हुक्म मानकर महज अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बानी करता है तो उसे अल्लाह की रज़ा हासिल होती है। बावजूद इसके अगर कोई शख़्स कुर्बानी महज दिखावे के तौर पर करता है तो अल्लाह उसकी कुर्बानी कबूल नहीं करता।

अलीनगर उत्तरी के रहने वाले अब्दुल रहमान ने कहा कि कुर्बानी के इस त्योहार में मोहब्बत व भाईचारा बढ़ता है। कुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीब, फकीर मुसलमानों में जरूर बांटा जाए।साफ-सफाई अल्लाह तआला को पसंद हैं इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। कुर्बानी का फोटो व वीडियो न बनाएं और न ही अपने कुर्बानी के जानवर की नुमाइश करें।

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